पैंगोलिन संरक्षण: नागालैंड के किफिर जिले में समुदाय-नेतृत्व वाला संरक्षण
चर्चा में क्यों
नागालैंड के किफिर जिले में, भारत-म्यांमार सीमा के पास, स्थानीय समुदाय पैंगोलिन के संरक्षण के प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं, जो सांस्कृतिक मान्यताओं और अवैध व्यापार के कारण शिकार से खतरे में हैं। संरक्षणवादी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधों को लागू करने के लिए ग्राम परिषदों और पारंपरिक अदालतों के साथ सहयोग कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
यह सीमावर्ती क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण की चुनौती और संरक्षण प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी तथा पारंपरिक कानूनों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है, विशेषकर पैंगोलिन जैसी अनुसूची I प्रजातियों के लिए। यह राष्ट्रीय कानूनों में प्रवर्तन अंतराल को भी रेखांकित करता है।
महत्वपूर्ण आंकड़ा
• वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 — पैंगोलिन के लिए अनुसूची I संरक्षण • स्रोत में आंकड़ा निर्दिष्ट नहीं है।
मुख्य तथ्य
- 1भारतीय पैंगोलिन (मैनिस क्रैसिकाउडाटा): IUCN स्थिति – लुप्तप्राय (Endangered) | CITES परिशिष्ट I।
- 2चीनी पैंगोलिन (मैनिस पेंटाडैक्टाइला): IUCN स्थिति – गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered) | CITES परिशिष्ट I।
- 3वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: पैंगोलिन अनुसूची I के तहत सूचीबद्ध हैं, जिन्हें उच्चतम संरक्षण प्राप्त है।
- 4किफिर जिला: नागालैंड में स्थित, भारत-म्यांमार की झरझरी सीमा के साथ।
- 5भारत-म्यांमार सीमा: नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मिजोरम म्यांमार के साथ सीमा साझा करते हैं।
- 6पारंपरिक कानून: आदिवासी क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त, अक्सर संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत।
परीक्षा कोण
The governance challenge in wildlife conservation involves integrating national laws like the WPA 1972 with local customary practices and strengthening enforcement mechanisms in sensitive border regions.
PYQ संदर्भ
PRELIMS_FACT: IUCN status of species; MATCHING: Wildlife Protection Act schedules
मानचित्र बिंदु