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GS2 — राजव्यवस्था व शासन

मुख्यमंत्री की नियुक्ति: संवैधानिक प्रावधान और राज्यपाल की भूमिका

1 मिनट पढ़ें6 मुख्य तथ्य

चर्चा में क्यों

केरल में देरी से उजागर हुई मुख्यमंत्री की नियुक्ति की प्रक्रिया विशिष्ट संवैधानिक प्रावधानों द्वारा शासित होती है। संविधान राज्यपाल की भूमिका और मंत्रिपरिषद की विधान सभा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।


पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री की नियुक्ति के लिए संवैधानिक ढांचे को समझना राज्य शासन और राज्यपाल तथा निर्वाचित सरकार के बीच शक्ति के नाजुक संतुलन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर राजनीतिक अनिश्चितता के परिदृश्यों में।


महत्वपूर्ण आंकड़ा

• 6 महीने — गैर-विधायक के मंत्री रहने की अधिकतम अवधि


मुख्य तथ्य

  1. 1अनुच्छेद 164(1): मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है; अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है।
  2. 2अनुच्छेद 164(2): मंत्रिपरिषद (CoM) राज्य की विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
  3. 3अनुच्छेद 164(4): एक मंत्री जो लगातार छह महीने तक राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रहता, वह मंत्री नहीं रहता।
  4. 4अनुच्छेद 163: राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करता है, सिवाय उन मामलों के जहाँ संविधान विवेकाधिकार की आवश्यकता बताता है।
  5. 5राज्यपाल की भूमिका: मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है, पद की शपथ दिलाता है, राज्य विधानमंडल को आहूत/सत्रावसान करता है (अनुच्छेद 174)।
  6. 6संवैधानिक परंपरा: राज्यपाल बहुमत दल या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करता है।

परीक्षा कोण

The constitutional provisions regarding the appointment of the Chief Minister and the Governor's discretionary powers are critical for ensuring governmental stability and upholding democratic principles, often tested by political dynamics.


PYQ संदर्भ

📜

PRELIMS_FACT: Constitutional Articles related to CM/Governor; ASSERTION_REASON: Collective responsibility of CoM.

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